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दक्षिण एशिया में अनिश्चित भविष्य का पूर्वाभास है समय से पहले आने वाली प्रचंड लू

पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत ने अप्रैल के शुरू में ही अपने नागरिकों को आने वाले वक्त में उच्च तापमान के लिए सचेत कर दिया था। इस मामले में विशेषज्ञ तत्काल अनुकूलन आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
मई, 2016 में पाकिस्तान के कराची शहर में एक ऐसे ही भयानक गर्मी वाले दिन एक परिवार समुद्र के किनारे से गुजर रहा है  (Image: Reuters/Akhtar Soomro)
मई, 2016 में पाकिस्तान के कराची शहर में एक ऐसे ही भयानक गर्मी वाले दिन एक परिवार समुद्र के किनारे से गुजर रहा है (Image: Reuters/Akhtar Soomro)

वसंत ऋतु के दौरान, पाकिस्तान के सबसे बड़े महानगर, कराची के निवासियों ने, साल की पहली प्रचंड लू का सामना किया। वहां 3 अप्रैल को पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह 1947 के बाद अप्रैल में दर्ज किया गया उच्चतम तापमान है। इससे साफ होता है कि आने वाले वक्त में लोगों को एक क्रूर गर्मी का सामना करना होगा।

शहर भर में भयानक गर्मी पांव पसार चुकी है। इसलिए कराची के इंप्रेस मार्केट में थके हुए दुकानदारों ने अपनी दुकानों का शटर गिरा लिया है।  65 वर्षीय फल विक्रेता दीन मुहम्मद अपनी पगड़ी को पानी में डुबाते हैं। इस दोपहर की धूप में उनकी दाढ़ी पसीने टपक रहे हैं। अपने सामने के कंक्रीट के जंगलों की ओर इशारा करते हुए The Third Pole से वह कहते हैं,”मैं इस गर्मी में कहीं भी शरण नहीं ले सकता। वहां कोई पेड़ भी नहीं है।

कोविड-19 महामारी पूरे पाकिस्तान में बढ़ रही है। देश में इसकी तीसरी तीसरी लहर से 4 अप्रैल को गंभीर रोगियों की कुल संख्या 3,568 थी। इसका प्रकोप शुरू होने के बाद यह आंकड़ा सबसे अधिक है। लेकिन दीन मुहम्मद, जो कराची की धुंधली हवा में सांस लेते हुए खुले आसमान के नीचे अपने दिन बिताते हैं, कहते हैं कि उन्हें कोरोना वायरस की जगह की गर्मी से डर है, जो उनकी जान ले सकती है। बाकी अल्लाह की मर्जी। वैसे मुझे उम्मीद है कि गर्मियों में मैं जीवित रहूंगा।

जलवायु परिवर्तन की मानवीय लागत

कई दक्षिण एशियाई देशों में, लू मई में शुरू होती है और सितंबर तक रहती है। लेकिन इस साल मार्च के अंत में ही उच्च तापमान की चेतावनी जारी की गई थी। हालांकि नेपाल में कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। बांग्लादेश और भारत दोनों पहले से ही उच्च तापमान का सामना कर रहे हैं।

1 अप्रैल को, नई दिल्ली में पारा 40.1 डिग्री सेल्सियस पर था जो 76 वर्षों में इस दिन दर्ज किया गया उच्चतम तापमान था। भारत के मौसम विभाग ने अप्रैल और जून के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में “सामान्य से अधिक” तापमान की चेतावनी दी है।

पाकिस्तान के मौसम विभाग के सरदार सरफ़राज इस प्रचंड लू के समय से पहले के आने को पारंपरिक मौसम के तौर-तरीकों में बिखराव को जिम्मेदार मानते हैं जो कि जलवायु परिवर्तन का एक परिणाम है।

इस वर्ष विशेष रूप से, एक पश्चिमी विक्षोभ ने शुरुआत में ही शुष्क हवा के साथ देश को घेर लिया, जिससे कराची तक समुद्री हवा की पहुंच बंद हो गई और तापमान बढ़ गया। सरफराज कहते हैं, “अभी बहुत  अप्रत्याशित स्थिति है।” हाल के वर्षों में, दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान के सिंध प्रांत में लू का एक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। 2015 में, कराची का तापमान 66 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिससे कम से कम 1,200 लोग मारे गए, जिसमें 40,000 लोग हीटस्ट्रोक और गर्मी की वजह से होने वाली थकावट से पीड़ित थे।

हीट इंडेक्स क्या है?

इसे स्पष्ट तापमान के रूप में भी जाना जाता है। हीट इंडेक्स में हवा के तापमान और सापेक्ष आर्द्रता को जोड़ा जाता है। यही एक उपाय है जिससे पता चलता है कि मानव शरीर तापमान की गर्मी को कितना अनुभव करता है।

शहर के सरकारी जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर में आपातकालीन विभाग की प्रमुख सीमिन जमाली बताते हैं कि उन्होंने 2015 के हीटवेव के चरम के दौरान आपातकालीन कक्ष में एक के बाद एक अनेक लाशें देखीं। मरने वालों में से अधिकांश बुजुर्ग थे और ये झुग्गियों में रहते थे।

जमाली कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन से अप्रत्याशित और खतरनाक मौसम जैसी स्थितियां पैदा हो गई हैं जिससे शहर के 2 करोड़ लोगों का जीवन बहुत दुखमय बन गया है। पिछले साल के मानसून के दौरान शहर में अप्रत्याशित रूप से बहुत भारी बारिश हुई। यह बारिश 1931 के बाद सबसे ज्यादा थी। इससे शहर का एक बहुत बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था और कई दिनों तक लोगों को बिना बिजली के जीवन बिताना पड़ा। कम से कम 41 लोग मारे गए थे। जिस तरह से हमारा शहर तेजी से फैलता जा रहा है और उससे पेड़ों और हरे-भरे स्थानों की जगह कंक्रीट की संरचनाएं और इमारतें खड़ी होती जा रही हैं। यह सब देखकर मैं अपने भविष्य को लेकर चिंतित हूं।

Karachi heatwave 2015
कराची, पाकिस्तान में 2015 में प्रचंड लू के दौरान लोग बारिश के लिए दुआ करते थे। (Image: Akhtar Soomro/Alamy-Reuters)

लू अब सामान्य बात बनती जा रही है

वेट बल्ब तापमान क्या है?

हीट इंडेक्स की तरह, वेट बल्ब तापमान, आर्द्रता और तापमान को शामिल करता है। इसके अलावा यह हवा की गति, बादलों, सूर्य कोण और शारीरिक गतिविधि को भी देखता है।

एक वेट बल्ब का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस होने पर बाहर श्रम करना असुरक्षित हो जाता है। मनुष्य 35 डिग्री सेल्सियस तक में ही अपना अस्तित्व ठीक से बनाये रख सकता है। इससे अधिक के तापमान पर उसका शरीर अपने आप को खुद से ठंडा नहीं रख सकता। अध्ययन के प्रमुख लेखक फहद सईद ने कहा कि दक्षिण एशिया में लाखों लोग जल्द ही घातक गर्मी के कारण अतिसंवेदनशील होंगे, जब “वेट बल्ब” का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाएगा।

एक वैज्ञानिक पत्रिका, जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन की भविष्यवाणी है कि सबसे खराब हालात अभी तक आने बाकी हैं। भविष्य की आबादी का अनुमान और जलवायु परिवर्तन संबंधी अनुमानों के इस्तेमाल से हुए अध्ययन से पता चलता है कि भले ही पेरिस समझौते के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करते हुए ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर समाहित कर लिया जाए फिर भी दक्षिण एशिया में घातक गर्म लू की घटनाएं बहुत अधिक होने की आशंका बनी हुई है।

Iयह क्षेत्र 1.5 बिलियन से अधिक लोगों का निवास स्थान है। सईद का यह अनुसंधान इन लोगों के लिए खतरे की घंटी जैसा है। दक्षिण एशिया की लगभग 60 फीसदी आबादी कृषि में लगी हुई है और बढ़ते तापमान से फसल की पैदावार और लक्ष्य, साथ ही साथ श्रम उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका है। पूरे दक्षिण एशिया में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नए आवासों के निर्माण में लगी श्रमिक आबादी एक अन्य संवेदनशील वर्ग है।

तटीय शहर और गरीब सबसे ज्यादा संवेदनशील

कराची और मुंबई जैसे तटीय आबादी वाले शहरों को इससे विशेष रूप से जोखिम है। “जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप नमी को बनाए रखने की हमारे वातावरण की क्षमता बढ़ रही है, जिसका अर्थ है कि आर्द्रता में वृद्धि होगी। यह स्थिति तटीय शहरों को विशेष रूप से असुरक्षित बनाता है।” उच्च तापमान के साथ अगर अधिक आर्द्रता भी जुड़ जाती है तो यह एक तरह से आपदा की स्थिति पैदा कर देगी।”

सईद कहते हैं कि अध्ययन में कहा गया है कि बढ़ते तापमान का सबसे ज्यादा असर कराची, पेशावर, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में मजदूरों और औद्योगिक श्रमिकों द्वारा महसूस किया जाएगा। ये वे लोग हैं जिनके पास एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है और ये गरीबों में भी सबसे गरीब हैं।

Karachi Pakistan heatwave 2018
मई 2018 में पाकिस्तान के कराची में लू के दौरान सड़क के किनारे लगे फव्वारे से खुद को राहत देते लोग (Image: Alamy Live News)

दूसरे शब्दों में, एक ऐसे क्षेत्र में बढ़ते तापमान से गरीबी बढ़ सकती है, सार्वजनिक स्वास्थ्य बिगड़ सकता है और जीवन स्तर में तेजी से गिरावट आ सकती है जहां   एक ऐसे क्षेत्र में रहने के मानकों में भारी कमी हो सकती है जहां की 26 फीसदी  जनसंख्या यानी तकरीबन 21.6 करोड़ गरीब लोग रहते हैं।

बढ़ती गर्मी का महिलाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी थिंक टैंक अर्बन इंस्टीट्यूट के 2017 के एक अध्ययन में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से उपजी समस्याओं से गरीब महिलाओं के बीच घरेलू दुर्व्यवहार और नींद की कमी जैसे दिक्कतें बढ़ गई हैं। यह भी पाया गया कि दिल्ली और इस्लामाबाद में महिलाओं को रोजाना परिवार के सदस्यों की देखभाल के लिए औसतन एक घंटे अधिक देने पड़े अगर उनके परिवार का कोई सदस्य पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण बीमार पड़ गया।

ऊर्जा नीति सलाहकार नेमाराह हमीद ने कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन की गति को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की वकालत की। हमीद कहते हैं कि लैंगिक समानता पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है। इसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिला नेताओं को शामिल करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नीतिगत कार्य, विशेष लैंगिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हों, जिसमें स्वच्छ खाना पकाना, आपदा को कम से कम करना और जोखिम प्रबंधन शामिल है।

अनुकूलन अब हमारे लिए कोई विकल्प नहीं है। यह अपरिहार्य है
फहद सईद, जलवायु वैज्ञानिक

फहद सईद कहते हैं कि दक्षिण एशिया में जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार और खतरनाक गर्म लू को अनुकूलित करना अब अपरिहार्य है। वे सार्वजनिक स्थानों – जैसे पूजा स्थलों, पुस्तकालयों और सामुदायिक केंद्रों में कृत्रिम शीतलन प्रणाली के उपयोग का सुझाव देते हैं। साथ ही हीट वेव संकट के दौरान लोगों की मदद करने वाली आपदा प्रबंधन टीम को प्रशिक्षित करने की जरूरत पर भी जोर देते हैं।

हालांकि, कृत्रिम शीतलन की प्रक्रिया की खराब योजना के विस्तार के कारण जोखिम बढ़ गया है। एयर कंडीशनिंग में भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। इससे जैव ईंधन की खपत बढ़ती है। कई शीतलन तकनीकें हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) जैसी गैसों का उपयोग करती हैं, जिससे वातावरण में कई गुना ज्यादा गर्मी पैदा होती है। इससे बचने के लिए ऊर्जा-कुशल और एचएफसी-फ्री कूलिंग तकनीक में निवेश महत्वपूर्ण है।

भारत और पाकिस्तान भले ही राजनीतिक दृष्टि से एक-दूसरे के साथ न नजर आएं, लेकिन जलवायु परिवर्तन निश्चित रूप से इन दोनों के बीच अंतर नहीं करता है। सईद कहते हैं कि यह समय है जब ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को और मजबूत व एकजुट करना चाहिए। अनुकूलन अब हमारे लिए कोई विकल्प नहीं है। यह अपरिहार्य है।

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