जहांग लीज़वी को कुत्ते पसंद हैं। गत अगस्त में तिब्बती पठार पर क्विंघई के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में युशु में उनमें से दो के साथ हुई मुठभेड़ शंघाई कार्यालय अधिकारी के लिए एक भयावह याद है। ज़हांग ने न्यूजचाइना को जनवरी में बताया, “मेरे दोनों पैर में अभी भी निशान बने हैं।”

ज़हांग देर दोपहरी युशु के बाहरी इलाके में बौद्ध जीईयु मठ की यात्रा पर थीं, तभी अचानक एक आवारा कुत्ता उस पर भौंका। ज़हांग ने स्मरण करते हुए बताया, “मैं डर गई थी, और इतनी देर एक दूसरा कुत्ता भी वहां आ गया- दोनों में मुझ पर साथ में हमला किया। मेरे घावों पर दर्जनों से अधिक टांके लगे थे।”

परंपरा/ विरासत

चीन के पश्चिमी क्षेत्र के विशाल पहाड़ी चारागाहों में, स्थानीय तिब्बती लोग अपने कुत्तों के करीब होते हैं। तिब्बती मैस्टिफ, ऊंची जमीन पर मूल शीपडॉग की एक प्रजाति, खानाबदोश परिवारों द्वारा संभावित खतरा के विरोध में एक वफादार सुरक्षक के रूप में लंबे समय से रखा जा रहा है। ये महाकाय कुत्ते, कुछ तो 70 किग्रा से भी ज्यादा वजन के, खूंखार साथी हैं।

पठार पर तिब्बती Mastiff

तिब्बती कहावतों के अनुसार, ऊंची जमीन के जौ का पहला बीज, जो तिब्बती क्षेत्रों का मुख्य भोजन है, मैस्टिफ द्वारा लाया जाता है। आज भी लोसर (तिब्बत में बौद्ध धर्म का त्यौहार) या तिब्बती नव वर्ष के उत्सव के दौरान खानाबदोश तिब्बती अपना आभार दिखाने के लिए अभी भी अपने पारिवारिक कुत्तों को जनबा (भुना हुआ जौ का आटा) का एक कटोरा खिलाते हैं।

युशु के स्थानीय तिब्बती ताशी गोंगबाओ ने बताया, “परंपरागत रूप से, कुत्तों को परिवार के अहम सदस्यों की तरह माना जाता है, और हम अपने कुत्ते पैसों के लिए दूसरों को कभी नहीं बेचते हैं। वास्तव में हमारी पारंपरागत संस्कृति में कुत्तों को बेचना पर पाबंदी है। लेकिन जब 1990 के दशक में चीन में तिब्बती मैस्टिफ की सनक बह गई, तब परिस्थितियां पूरी तरह से बदल गई।”

ताशी गोंगबाओ चीन के पार भी तिब्बती मैस्टिफ के लिए बढ़ते पागलपन की ओर इशारा कर रही थी, जिससे तिब्बती क्षेत्रों विशेषकर युशु के आस-पास तिब्बतों कुत्तों को बढ़ाने और बेचने के उन्माद को उकसाया। यह उत्साह 2010 के मध्य तक व्याप्त रहा। कोयला व्यापारियों समेत धनी चीनीयों की मांग के कारण पागलपन की हद के दौरान कुछ प्रीमियम प्योरब्रेड 2,00,000 अमेरिकी डॉलर (1.3 मिलियन यूआन) से भी ज्याया में बिके। अंदर और बाहर दोनों तिब्बती क्षेत्रों के कई लोगों ने कुत्तों को पूर्णत: व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए लिया है।

मैंने 2010 में युशु का दौरा किया और युशु के केंद्र के विभिन्न हिस्सों में तिब्बती कुत्तों को पिंजड़े में कैद देखा। उस समय के स्थानीय स्रोतों ने बाजार में  मैस्टिफ कुत्ते की औसत कीमत 200,000 युआन (29,040 अमेरिकी डॉलर) बताई। सनलियन लाइफवीक मैगजीन की जून 2016 की एक रिपोर्ट के अनुसार 2005 के आसपास, युशु में कुछ प्रजनक उन्हें बड़ा और मजबूत बनाने के लिए कुत्तों को तरल पनीर या रासानियक पदार्थ का ट्यूब से भोजन देना शुरू कर दिया था। यहां तक कि कुछ प्रजनकों ने अधिक शक्तिशाली दिखने के लिए अपने कुत्तों को सिलिकॉन या पानी के साथ पंप किया था, जो कि कुत्तों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।

लेकिन अन्य सट्टा बाजारों की तरह, 2012 के बाद से तिब्बती मैस्टिफ का उत्साह आर्थिक मंदी और राष्ट्रव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के कारण बुरी तरह से खत्म हो गया। 2013 के आसपास बुलबुला तब फटा, जब कीमतें अचानक घटीं। 2015 की शुरुआत में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार कि करीब 20 मैस्टिफ एक ट्रक में भरे गए और पूर्वोत्तर चीन के एक कसाईखाना में भेजी गई, जहां एक सिर मोटे तौर पर 5 अमेरिकी डॉलर (35 युआन) का था, वे उनको एक गरम बर्तन की सामग्री में डालेंगे, कृत्रिम चमड़ा बनाएंगे और उससे सर्दियों के दस्ताने बनाएंगे।

जैसे ही तेजी से बढ़ता हुआ बाजार ध्वस्त हो गया, और ज्यादातर खानाबदोस परिवार शहर में बस चुकी थी, तिब्बती मैस्टिफ की मांग में लगातार गिरी।

ताशी गोंगबाओ ने बताया, “2010 से पहले, लगभग प्रत्येक परिवार मैस्टिफ को खिलाने और बढ़ाने में बहुत पैसे लगा रहा था। बहुत सीमित लोगों को फायदा हुआ, लेकिन अधिकांश लोग निर्धन हो गए। और बाद में प्रजनकों ने मूर्खतापूर्ण असली तिब्बती मैस्टिफ को अन्य प्रजातियों के साथ मिला दिया, जिससे इस प्रजाति की कीमत कम हो गई और आने वाले ग्राहकों को खत्म कर दिया।”

Maozhuang में लोहे के तारों के बीच इनको रखा जाता है (Photo by Wang Yan)

ताशी गोंगबाओं ने कहा कि कुछ गलत प्रजातियों ने कुत्तों की वफादारी को खो दिया और इसलिए मैस्टिफ की कीमत कम हो गई और यहां तक कि वे अपने मालिक पर ही उत्तेजित हो गए। इससे उनकी छवि पर गलत प्रभाव पड़ा, जिस कारण मालिकों और प्रजनकों द्वारा कुत्तों को छोड़ दिया गया, जिसका परिणाम एक बड़ी संख्या में आवारा कुत्तों के रूप में सामने आया।

जैसे ही क्रेता गए, प्रजनक भी जल्द ही खत्म हो गए। क्वींघाई तिब्बती मैस्टीफ एसोसिएशन के चेयरमैन जोयु यी ने सिन्हुआ न्यूज एजेंसी को बताया कि एक तिहाई प्रजनकों ने अपना व्यापार बंद कर दिया और क्वींघाई में तिब्बती मैस्टीफ का सालाना व्यापार 200 मिलियन युआन (29 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक से गिरकर 50 मिलियन यूआन (7.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से भी कम हो गई।

स्थानीय सरकार द्वारा कोई कदम न उठाए जाने के कारण, छोड़े गए कुत्तों में तेजी से वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप लोगों पर हमलों की संख्या बढ़ गई।

बौद्ध प्रतिरोध

एक आंतरिक स्रोत के अनुसार, युशु के विभिन्न हिस्सों में कुछ स्थानीय सरकारों ने इस समस्या के समाधान के लिए कुत्तों की सामूहिक हत्या के रूप में गुप्त प्रयास किए। लेकिन स्थानीय तिब्बती बौद्ध धर्म में गहरा विश्वास करते हैं, जो सभी जीवित प्राणियों के प्रेम सिखाता है और हत्या से सार्वजनिक प्रतिरोध उत्पन्न हुआ।

कुछ गांवों ने पशुबध से बचने के लिए आवारा कुत्तों के लिए आश्रय बनाने का सहारा लिया। नांगक्वीयन देश के एक गांव माओजुआंग में स्थानीय आश्रम और गांव परिषद् के संयुक्त निवेश से 13 एकड़ में एक पशु आश्रय स्थापित किया गया।

अगस्त 2016 में माओजुआंग की एक यात्रा के दौरान, इस संवाददाता ने गांव जाने वाली सड़क के किनारे 1,000 से अधिक आवारा कुत्तों के देखभाल वाला एक खुला आश्रय देखा।

एक स्थानीय ग्रामीण कैरीन योंगगजांग ने कहा कि आश्रय बनने से पहले आवारा कुत्ते हर जगह थे और बुजुर्ग लोग और बच्चे अकेले बाहर जाने से डरते थे। कुत्तों के मल और मूत्र ने गांव में बदबू फैला दी थी, जिससे स्वास्थ्य को खतरा था। स्थानीय निवासियों में इन अवारा कुत्तों के हमले का डर रहता था। कैरन ने आगे बताया “माओजुआंग में स्थानीय सुमंग मठ में एक बड़ी संख्या में कुत्तों को उनके मालिकों ने इस उम्मीद में छोड़ दिया कि भिक्षु उनकी देखभाल करेंगे। तब मठ ने इस मसले का स्थायी समाधान निकालने का निर्णय लिया।”

सुमंग मठ से कुल 400,000 यूआन (58,000 अमेरिकी डॉलर) एकत्रित किए, जिसमें से आधा कोष सरकार ने दिया। 2016 की शुरुआत में आवारा कुत्तों के लिए आश्रय स्थापित करने के लिए। माओजुआंग में प्रत्येक परिवार से सामुदायिक सदस्यों को उन आवारा कुत्तों को पकड़ने और उस आश्रय में ले जाने में मद्द के लिए बुलाया गया।

मठ का रखवाल ताशी ने बताया, “हमने बाड़े और तीन कुत्तों का घर और कुछ बुनियादी ढांचा समेत पहाड़ से आश्रय तक की एक पानी चक्करदार पाइपलाइन बनाई है।” ताशी के अनुसार, 47 वर्षीय एक स्थानीय भिक्षु, जो माओजुआंग में पैदा हुआ था (ताशी गोंगबाओ से इतर व्यक्ति), मठ ने ग्रामीणों को शरण में लाने के लिए तीन दिन का समय दिया। उसने बताया, “उसके बाद, हमने नए लोगों पर सामूहिक हमले से बचने के लिए अतिरिक्त नए कुत्तों को निषेध कर दिया।

तब मठ ने एक स्थानीय पशुचिकित्सक को कुतिया को बांझ बनाने और ग्रामीणों में से दो कर्मचारियों को खाना बनाने के लिए भुगतान किया। मुख्य रूप से जौ का मिश्रण के साथ पास के ग्रामीणों के पास बचा हुआ अतिरिक्त खाना उन कुत्तों का भोजन है। माओजुहांग में केवल 600 परिवार हैं, लेकिन ग्रामीण मठ को कुत्तों के भोजन के रूप में समय-समय पर जौ, नूडल्स और दही देने की पूरी कोशिश करते हैं। ताशी के अनुसार, आश्रय के रख-रखाव और कुत्तों की देखभाल के लिए होने वाला दैनिक खर्च कम से कम 1,000 यूआन है।

हाल ही के 10,000 किग्रा आटे के दान के अतिरिक्त युशु सरकार से आर्थिक सहायता नहीं की। ताशी के अनुसार, क्वींघाई आधारित पार्यावरण एनजीओ गांगरी नेचोग रिसर्च एंड कंसरवेशन सेंटर ने 2016 में जन कोष के माध्यम से मठ को 10,000 युआन (1,446 अमेरिकी डॉलर) दिए। माओजुआंग के ग्रामीण योंग क्वीआंग ने कहा, इसके अतिरिक्त, “1,000 या उससे अधिक कुत्तों की देखभाल का आर्थिक भार केवल मठ के ऊपर आता है।

असुरक्षित देखभाल

इस क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आश्रय देने का यह प्रयास सराहनीय है। यद्यपि युशु शहर के केंद्र के पास एक सरकार पोषित कुत्ता आश्रय स्थापित करने के लिए कहा गया है, लेकिन यह प्रमाणित नहीं है। युशु सरकार ने पर्यटन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए जानबूझ कर इस मुद्दे को दबाया, यह कहना है एक आंतरिक सूत्र का, जो गुमनाम रहना चाहता है।

लेकिन माओजुआंग में भिक्षुओं और ग्रामीणों को पता है कि परिस्थितियां बनी नहीं रह सकती। पहली समस्या है भोजन की कमी। इसके बाद कुत्तों के बीच लड़ाई होती है और एक साथ रहने से बीमारियां तेजी से फैलती हैं।

पीड़ित व्यक्ति झांग लिजी ने कहा, “मुझे कुत्ते बेहद पसंद है और अक्सर मुझे आवारा कुत्तों पर दया आती है। लेकिन अब परिस्थितियां भयावह हो चुकी हैं, तब से जब कुत्ते लोगों विशेषकर छोटे बच्चों पर समूह में हमला करते हैं। क्वींघाई में आवारा कुत्तों के इस गंभीर मुद्दों को संभालने की जिम्मेदारी सरकार की है।”

पिछले दशकों में केंद्र सरकार ने तिब्बती पठार के सांझियांगयूआन (तीन नदी का स्रोत) क्षेत्र, जहां माओजुआंग स्थित है, के संरक्षण में अरबों यूआन लगा चुकी है। हालांकि, शिक्षार्थी इस बात का तर्क करते हैं कि यह पैसा पारस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और स्थानीय लोगों के जीवन सुधार में प्रयोग होना चाहिए। अगर इन कोषों का एक हिस्सा भी आवारा कुत्तों के स्थायी आवास बनाने के लिए प्रयोग किया जाए, जो परिस्थितियों में तुरंत सुधार होगा।

अब ठंड में, जब माओजुआंग का तापमान माइनस 20 डिग्री पहुंच जाता है, कुत्तों को आश्रय में रहने के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। महंत ताशी ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि कुत्तों से लगाव रखने वाले लोग आएंगे और उनमें से कुछ गोद लेगें (अपनाएंगे)। हम उनकी दयालुता और सहयोगी के लिए आभारी रहेंगे।

3 comments

  1. Hello !

    Thank you for posting this interesting article.
    I would love to volunteer in the dog shelter in Yushu.
    If anyone reads this, please let me know if you have any information about volunteering work there.

    Thank you

  2. Richard Hyer |

    why would these dog be abandoned? These dogs are known to be quite clever but they can also be stubborn at times. Proper training, especially while they are still pups, will allow them to be more docile to commands so why abandon such lovely breed. This bread can make a family happy, from the details i got check it out here

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